एक दोस्त है भूला भटका सा

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एक दोस्त है भूला भटका सा,
एक दोस्त है प्यारा प्यारा सा….
खो गई कहीं उसकी हंसी,
क्या कोई ढूंढेगा कहीं…?
शायद कहीं भूल आई हो,
या फिर छिन गई कहीं,
दुनिया के इस समंदर में,
तैरना तो नहीं भूल गए कहीं…?
एक दोस्त है भूला भटका सा,
एक दोस्त है प्यारा प्यारा सा….
खुशी को मत तलाश कर,
तलाशना है तो सुकून को तलाश,
तू है एक अनमोल रत्न,
क्यों ज़ाहिर करती अपनी खुशी,
पलट, देख बैठे है तेरे इंतजार में,
कुछ लम्हें बिखरे बिखरे से,
तेरी हर खुशी पर कुर्बान जाए,
वह तेरे अपने अपने से,
फिर क्यों भटकती तू गली गली…?
उठ, बड़ा हाथ और हासिल कर तू अपनी खुशी
एक दोस्त है भूला भटका सा,
एक दोस्त है प्यारा प्यारा सा….

(20 अक्टूबर 2015)


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©Ranjeeta Nath Ghai atrangizindagieksafar, 2016.

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